शनिवार, 4 अप्रैल 2020

रात 9 बजे 9 दीप…



असाधारण संयोग की घड़ी में असीम ऊर्जा पाने की जिद है यह, जो कोरोना से लड़ेगी
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रात 9 बजे 9 दीप…आपदा की इस घड़ी में  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश के अर्थ निकाले जा रहे हैं। ज्योतिष में इसका सही जवाब है। अंक ज्योतिष में अंक 9 को मंगल  अंक माना जाता है। मंगल सम्पूर्णता का अंक है। साथ ही ऊर्जा कारक ग्रह है। इसको बल देने से सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होगी। विरोधी ताकतों को परास्त करने में बल मिलेगा,  क्योंकि मंगल बल, पौरुष, सेना ,सेनापति आदि के कारक ग्रह भी है।जिस समय दीपक जलाया जाएगा उस समय अर्थात 9 बजे तुला लग्न का भोग हो रहा होगा। तुला लग्न में लग्नेश शुक्र अष्टम भाव मे होंगे। लग्नेश का अष्टम भाव मे होने से दीर्घायु की प्राप्ति होती है, साथ ही उसी समय सूर्य रोग एवं शत्रु भाव में विद्यमान होंगे। अतः जब हम दीपक जलाकर उजाला करेंगे तो चमक से शुक्र को बल प्राप्त होगा एवं सूर्य  को भी बल मिलेगा तथा आम जन मानस को दीर्घायु की प्राप्ति होगी।
दीर्घायु एवं अरोग्य की वृद्धि : ज्योतिर्विदों के अनुसार, 5 अप्रैल 2020 दिन रविवार को रवि प्रदोष व्रत है। रवि प्रदोष का दिन शिव शक्ति की उपासना की तिथि है। रविवार के दिन मुंदर नामक औदायिक योग का निर्माण भी हो रहा है। यह योग राक्षस ,विषाणु, राक्षसी प्रवृत्तियों के समन या मारने के लिए अति उत्तम योग है। दीर्घायु एवं आरोग्यता के लिए रवि प्रदोष व्रत किया जाता है। इस व्रत में प्रदोष काल के बाद रात्रि के प्रथम प्रहर में शिव-शक्ति की उपासना की जाती है। शिव ही संहार अथवा मृत्यु के स्वामी है इस प्रकार इस दिन दीपक जलाने से शिव-शक्ति की उपासना सहज रूप से ही हो जाती। अतः राक्षसी प्रवृत्तियों ,वायरस का नाश होगा तथा लोगों में दीर्घायु एवं अरोग्य की वृद्धि होगी।
ग्रहों की स्थिति ऐसी रहेगी : 5 अप्रैल 2020 दिन रविवार को चंद्रमा का गोचर सिंह राशि मे होगा अतः इस दिन की राशि होगी सिंह और गोचरीय ग्रहों की स्थिति है रोग ऋण और शत्रु भाव मे मंगल, शनि और बृहस्पति गोचर करेंगे। राज्य एवं पराक्रम के कारक ग्रह शुक्र स्वगृही होकर राज्य भाव मे विद्यमान रहेंगे। षष्ट भाव मे शनि, मंगल, एवं गुरु में मंगल सबसे अधिक बलवान हो रहे है, क्योंकि अंशो में सबसे अधिक होंगे उस दिन। साथ ही मंगल भाग्य एवं जनता कारक ग्रह होकर रोग एवं शत्रु भाव में उच्च का होकर भाग्य भाव पर दृष्टि पड़ेगी, अतः दीपक जलाकर ऊर्जा उत्पादित करके मंगल को बल मिलेगा तो रोग से लड़ने की क्षमता बढ़ेगी।


बुधवार, 18 जुलाई 2018

किस्मत फडणवीस के साथ



महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फडणवीस सही में किस्मत के धनी हैं। पार्श्व में जाने से पहले वर्तमान को देखें तो भी यह बात सौ फीसदी सच साबित हो रही है। लंबे अंतराल के बाद नागपुर मंे मानसून सत्र चल रहा है। सरकार नागपुर में है। आला प्रशासनिक अमला भी यहीं पर है और उधर मुंबई डूब रही है। मौसम विभाग अलर्ट पर अलर्ट जारी कर रहा है। फडणवीस फजीहत से साफ बच रहे हैं। मुंबई में मानसून सत्र चल रहा होता तो भारी किरकिरी का सामना सरकार को करना पड़ता। बारिश ने नागपुर में भी रंग जमाया, लेकिन सरकार बदरंग होने से बच गई। विपक्ष के मुद्दे प्रभाव नहीं छोड़ रहे हैं, भले आरोप लग रहा है कि मुख्यमंत्री फडणवीस ‘पैजामे का नाड़ा खोल देने की’ धमकी देकर अपना काम चला रहे हैं।
वर्ष 2017 में 25 मई का दिन फडणवीस भूल नहीं सकते। एक बड़ी दुर्घटना का शिकार होने से वह बच गए
 थे। दरअसल जिस हेलिकॉप्टर में वह सवार थे, उसकी लातूर में क्रैश लैंडिंग करानी पड़ी। पायलट की सूझबूझ के चलते वह और उनकी टीम के सदस्य पूरी तरह सुरक्षित रहे। इस वर्ष फडणवीस एक बार फिर हादसे का शिकार होते-होते बचे। पायलट की सूझ-बूझ से कोई बड़ी दुर्घटना नहीं हुई। हेलिकॉप्टर में नितीन गडकरी भी थे।  हेलिकॉप्टर की लैंडिंग मुंबई के समीप भयंदर स्थित एक स्कूल में होनी थी। पायलट जैसे ही लैंडिंग के लिए हेलिकॉप्टर नीचे लेकर आ रहा था, तभी उसे मैदान के आस पास तारों का जाल फैला हुआ दिखा। उसने तुंरत हेलिकॉप्टर को ऊपर किया और वापस आसमान में ले गया। इससे पहले सीएम औरंगाबाद के लिए एक हेलिकॉप्टर से रवाना हुए जो कि ओवरलोडिंग के कारण नासिक से उतरने के तुरंत बाद भूमि पर वापस आने पर मजबूर हो गया। कोई दो राय नहीं, फडणवीस पर ऊपर वाले की मेहरबानी हमेशा रही।  
पार्श्व में जाएं तो किस्मत का खेल फडणवीस के हमेशा साथ रहा और महज 22 साल की उम्र में वह नागपुर स्थानीय निकाय से कॉरपोरेटर बन गए और 27 साल की आयु में 1997 में नागपुर के सबसे युवा मेयर चुने गए। कॉरपोरेटर से नागपुर के सबसे युवा मेयर बने देवेन्द्र फडणवीस महाराष्ट्र में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने राजनीतिक सीढ़ियां क्रमिक रूप से चढ़ी हैं। विधानसभा चुनाव में भाजपा के सबसे बड़े दल के रूप में उभरने के बाद मृदुभाषी और युवा नेता फडणवीस इस शीर्ष पद के लिए स्पष्ट रूप से पसंदीदा नेता बने। यहां
 तक कि पार्टी की प्रदेश कमेटी के कई नेताओं ने भी काफी लॉबिंग की। वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के भी विश्वस्त माने जाते हैं। चुनाव रैली में मोदी ने उनके लिए कहा था, ‘देवेन्द्र देश के लिए नागपुर का तोहफा हैं।’जनसंघ से जुड़े रहे और बाद में भाजपा के नेता बने दिवंगत गंगाधर फडणवीस के बेटे देवेन्द्र युवावस्था में ही राजनीति में उतर गए थे, जब वह 1989 में आरएसएस की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में शामिल हुए थे। गंगाधर को नागपुर के उनके साथी नेता और पूर्व पार्टी प्रमुख नितीन गडकरी अपना ‘राजनीतिक गुरु’ कहते हैं। हालांकि अपने गुरु के इस बेटे की उपलब्धि पर गडकरी को रस्क भी हुआ पर कभी कभी सामने नहीं आने दिया। फडणवीस के ‘राजनीतिक अश्वमेघ का घोड़ा’ सरपट दौड़ रहा है और हाशिए पर खड़े प्रतिद्वंद्वी उन्हें देखकर बस यही कह रहे हैं-किस्मत हो तो फडणवीस जैसी....।
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शुक्रवार, 7 अक्टूबर 2016

नागपुर में शिक्षा जगत का अब तक सबसे बड़ा घोटाला.....
संस्थान खोल पदों पर भर्ती किए ‘अपनों’ को
सरकार को अंधेरे में रख करोड़ों नहीं, अब तक ले चुके हैं अरबों
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सोमवार, 11 जुलाई 2016

एक पत्रकार की हकीकत 

सेवा में
श्रीमान नरेंद्र मोदी जी
प्रधानमंत्री
नमस्कार,
मैं आज एक विश्वास के साथ यह पत्र आप को लिख रहा हूँ कि अन्य विभागों की तरह लोकशाही के चार स्तंभ में से एक पत्रकारिता में युवाओ के रोजगार पर भी ध्यान देंगे। अंग्रेजों से आजादी की लड़ाई से लेकर आज तक देश के विकास में पत्रकारिता का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। समय के साथ पत्रकारिता में बदलाव आया है। जैसे कि आजादी की लड़ाई में पत्रकारिता का उद्देश्य अंग्रेजों से कलम की लड़ाई थी लेकिन आज समय के अनुसार यह बदलकर व्यापार बन गया है। आज के युवा पत्रकारिता की डिग्री लेकर अपना भविष्य बनाने में लगे हैं। डॉ भीमराव आंबेडकर, लोकमान्य गंगाधर तिलक, अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर आज के वरिष्ठ पत्रकारों को अपने आदर्श के रूप में देखते हुए युवा अपना भविष्य पत्रकारिता में बनाने के उद्देश्य से पत्रकारिता में आ रहे हैं।
मैं भी उन्हीं युवाओं की तरह पत्रकारिता में अपना भविष्य बनाने के उद्देश्य से पत्रकारिता की पढाई कर पत्रकारिता की शुरुआत की। पत्रकारिता में तो हमें बहुत कुछ पढ़ाया गया लेकिन वह सब पढाई तक ही अच्छा लगा। लेकिन पत्रकारिता की शुरुवात मैंने नवी मुंबई के वाशी से प्रकाशित होने वाले साप्ताहिक अखबार में 2006 से किया।
पहली बार जब उस अखबार में गया तो संपादक जी ने बकायदा मेरा इंटरव्यू लिया उसके बाद खबर लाने के साथ ही मुझे अखबार भी साथ में पकड़ा दिया कि इसे बाँटते जाना। खैर मुझे सीखना था इसलिए मैंने सोचा कि एकाध दिन कर देते हैं लेकिन बार बार अखबार बाँटने का काम दिए जाने के कारण मैंने वहां काम करना छोड़ दिया। उसके बाद मुंबई से प्रकाशित होने वाले कई अखबारों में 2007 तक काम किया। इस दौरान कई जगह मेरा वेतन भी नहीं मिला। इस बीच 2007 में हमारा महानगर अखबार से जुड़ा और आज तक जुड़ा रहा। कंपनी के कुछ डायरेक्टरों ने मुझे और कुछ स्टाफ का ट्रांसफर कर दिया जिसके कारण हम मुंबई के बाहर ज्वाइन नहीं किये। 2006 से लेकर अभी तक मैंने जितने भी अखबारों में काम किया वहां पत्रकारों का कोई भविष्य नजर नहीं आया। हां इतना जरूर देखा हूं कि जो नेताओं, मालिकों की चापलूसी और पुलिस की दलाली कर सकता है वह सफल है। हम भी मालिक के कई काम किये लेकिन चापलूसी नहीं कर पाये जिसके कारण आज भी चाल में छोटे मकान में रह रहे हैं।
मोदी जी, आप के प्रधानमंत्री बनने के पहले से ही देश के अधिकतर युवाओं और नागरिकों को विश्वास था कि हर क्षेत्र में रोजगार के लिए कदम उठाएंगे। आप कर भी रहे हैं लेकिन पत्रकारिता के क्षेत्र में आ रहे युवाओं के लिए अभी तक कोई कदम नहीं उठाये हैं। पत्रकारिता की पढाई पूरी करने के लिए देश भर में रोज नए- नए, बड़े-बड़े कॉलेज इंस्टीट्यूट खुल रहे हैं। उन कॉलेजों इंस्टीट्यूट में युवाओं को पत्रकारिता के गुण सिखाये जा रहे हैं लेकिन रोजगार के लिए कोई मार्ग नहीं है। कुछ युवाओं का नसीब सही माना जाए या उनका भाग्य माना जाए जो सफल हो जाते हैं नौकरी पाने में लेकिन अधिकतर युवक नौकरी की तलाश में भटकते रहते हैं। नौकरी नहीं मिलने पर अपने आप को कोसते रहते हैं कि आखिर क्यों मैं अपना समय पत्रकारिता में गंवा दिए। लाखों की संख्या में देश के युवक आज अपने आप को उसी तरह कोस रहे हैं। जो नौकरी कर भी रहे हैं उसमें से बहुत कम ही हैं जिन्हें उनके मेहनत के अनुसार मेहनताना मिल पाता है वरना गधे की तरह मजदूरी कर इस उम्मीद में समय बिता रहे हैं कि आज ना कल कुछ अच्छा होगा।
मोदी जी, आप से भी यही उम्मीद है कि पत्रकारिता के क्षेत्र को मजबूत करें जिससे युवाओं को रोजगार मिल सके। अगर नहीं मजबूत कर सकते या पत्रकारिता में रोजगार नहीं उपलब्ध करा सकते तो पत्रकारिता के उन कॉलेजों और इंस्टीट्यूट को बंद कर दे जिससे उन युवाओं के साथ धोखा ना हो सके जो इस क्षेत्र में अपना भविष्य बनाने के उद्देश्य से आना चाहते हैं। मोदी जी आप के सामने मैं बहुत ही छोटा हु ।लेकिन उन लाखों युवाओं की तरफ से यह पत्र लिखा हूं। पता नहीं कि आप इसे पढ़ेंगे भी या नहीं? लेकिन हम उम्मीद लगाये हैं कि विदेश दौरे से वापस आने के बाद जरूर कोई ठोस कदम उठाएंगे ताकि युवाओं का सपना अधूरा ना रहे।
धन्यवाद
एक पत्रकार
नागमणि पाण्डेय

मंगलवार, 28 अक्टूबर 2014

देवेंद्र पर इतराया नागपुर

 विधायक दल की बैठक में मंगलवार 28 अक्टूबर 2014 को भारतीय जनता पार्टी ने नया इतिहास बनाया है। पहली बार कोई भाजपाई महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनने जा रहा है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में विपक्षी नेता एकनाथ खड्से ने फडणवीस के नाम का प्रस्ताव रखा और सुधीर मुनगंटीवार ने अनुमोदन किया। फडणवीस को 31 अक्टूबर को वानखेडे स्टेडियम में मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलायी जायेगी।
 महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे  देवेंद्र फड़णवीस ने नागपुर के पार्षद से यहां तक का सफर तय किया है। उन्होंने राजनीति में शुरूआती 90 के दशक में कदम रखा। वे उसी समय पार्टी से जुड़े थे। साल 1992 में देवेंद्र नागपुर के सबसे कम उम्र में पार्षद बने थे। उन्हें 21 साल की उम्र में ये पद संभालने का मौका मिला और लगातार दो बार उन्होंने ये कुर्सी संभाली। यही नहीं, वो देश में सबसे कम उम्र में मेयर बनने वाले लोगों की सूची में दूसरे स्थान पर है। फडणवीस 1997 में 27 साल की उम्र में नागपुर के मेयर बन गये थे। साल 1999 से चार बार लगातार महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य रहे हैं। साल 1992 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के नागपुर अध्यक्ष बने और फिर 1994 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के स्टेट वाइस प्रेसिडेंट का पद संभाला। वर्ष 2001 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के नेशनल वाइस प्रेसिडेंट की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2010 में महाराष्ट्र भाजपा के सेक्रेट्री बने। इस प्रकार 2013 में महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष बन गए।
फडणवीस ने वर्ष 1986 में लॉ कॉलेज नागपुर से अपनी वकालत पूरी की थी। वो एबीवीपी के सदस्य भी थे। वकालत पूरी करने के बाद बिजनेस मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के साथ डीएसई, बर्लिन से प्रोजेक्ट मैनेजमेंट में डिप्लोमा कोर्स भी किया। फडणवीस का जन्म 1970 में नागपुर में हुआ था। उनके पिता जन संघ नागपुर से विधानपरिषद के सदस्य रहे हैं।
 देवेंद्र फडणवीस को राजनीति विरासत में मिली।  पिता गंगाधर राव फडणवीस नागपुर से एमएलसी थे। फडणवीस ने वार्ड स्तर से राजनीति शुरू की।  बीजेपी में वार्ड संयोजक से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक बनने का सफर तय किया। महज 27 साल की उम्र में नागपुर के मेयर बन चुके थे। फडणवीस की पहचान पढ़े लिखे नेता की है। बजट पर एक किताब भी वे लिख चुके हैं।
44 साल के देवेंद्र फडणवीस की छवि जमीन से जुड़े तेज तर्रार नेता की है।  उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करीबी माना जाता है। नागपुर की सभा में मोदी ने फडणवीस की खुल कर तारीफ की थी, मोदी ने फडणवीस को सक्रिय जनसेवक बताया था। वैसे फडणवीस की तारीफ उनके विरोधी भी करते हैं। चुनाव से ठीक एक दिन पहले महाराष्ट्र के पूर्व मुख्मयंत्री और कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने फडणवीस को मुख्यमंत्री पद का सबसे योग्य चेहरा बताया था।
 महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस बात के पक्के माने जाते हैं। वह मात्र 44 साल की उम्र में राज्य के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। वह जब 22 साल के थे, तभी पार्षद चुने गए थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष फडणवीस को राज्य में जमीन से जुड़े नेता के तौर पर जाना जाता है।
शरद पवार के बाद फडणवीस महाराष्ट्र के दूसरे सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री होंगे। पार्टी के अंदर फडणवीस को अपनी बात पर टिके रहने वाले नेता के तौर पर और आर्थिक एवं वाणिज्यिक मामलों के विशेषज्ञ के तौर पर जाना जाता है।
फडणवीस ने प्रखर वक्ता के रूप में भी अपनी पहचान बनाई है। मराठा पहचान के इर्द-गिर्द सिमटी महाराष्ट्र की राजनीति में फडणवीस अपनी जातीय पहचान को दबाकर ही रखते हैं। फडणवीस का कहना है कि महाराष्ट्र इस तरह की चीजों से बाहर निकल चुका है। आज का युवा विकास और तरक्की चाहता है।
आरएसएस के गढ़ नागपुर में 1970 में जन्मे फडणवीस ने राजनीति में देर से प्रवेश किया, लेकिन पार्टी में उनकी तरक्की बेहद तेज रही। फडणवीस हालांकि कॉलेज में भाजपा की युवा इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से भी जुड़े रहे। उन्होंने अपने विधायक पिता गंगाधर आर फडणवीस और विदर्भ हाउसिंग क्रेडिट सोसायटी की निदेशक रहीं अपनी मां सरिता से राजनीति का ककहरा सीखा।
 वक्तृत्व कला के धनी फडणवीस को कॉमनवेल्थ पार्लियामेंटरी एसोसिएशन द्वारा 2002-03 में सर्वश्रेष्ठ सांसद चुना गया। भाजपा के एक नेता ने कहा है कि फडणवीस सभी का सम्मान करते हैं और उन्होंने किसी के साथ कोई गड़बड़ी नहीं की। वह अपने साथी पार्टी सदस्यों से सुझाव लेते हैं, लेकिन अपने विवेकानुसार ही काम करते हैं। वह बहुत ही धैर्यशील व्यक्ति हैं ।
फडणवीस को उनकी क्षमता देखते हुए 2013 के मध्य में पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया। वह सबसे कम उम्र में इस पद पर बैठे। फडणवीस के पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी ने मोदी लहर का पूरा लाभ उठाते हुए राज्य की 48 सीटों में से 23 पर जीत हासिल की। विधानसभा चुनाव के लिए मोदी की रैलियों के अतिरिक्त फडणवीस ने राज्य में 100 से अधिक चुनावी रैलियां कीं और पार्टी का बड़ा चेहरा बनकर उभरे।
सरकार, अब सरकार भी आपकी : अमरावती के चांदुर बाजार में नेताजी चौक स्थित मैदान पर तब चुनाव प्रचार के दौरान देवेंद्र फडणवीस ने अपने 20 मिनट के भाषण में  कहा था कि देश के सीमापर देश की सुरक्षा के दौरान अब तक सीमा पर जितने जवान शहीद नहीं हुए, उससे ज्यादा विदर्भ के किसानों की आत्महत्या का आंकड़ा है। जिस तरह फसल को घास बर्बाद करता है, वैसा ही महाराष्ट्र को राष्ट्रवादी-कांग्रेस ने 15 साल में बर्बाद किया है। आसमानी संकट के बजाय सुल्तानी संकट के कारण ही महाराष्ट्र के किसानों ने आत्महत्या की है। विदर्भ के किसानों के लिए घोषित किये गए पैकेज का लाभ विदर्भ के किसानों के बजाय सत्ता धारियों ने ही लिया। 3 माह में 30 हजार करोड़ की बढ़ोत्तरी सिंचन व्यवस्था में की, ऐसे घोटालेबाज राज्य सरकार से हिसाब मांगा जाएगा। फड़णवीसजी अब सरकार आपकी है और हिसाब-किताब भी आपको ही लगाना है।  
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गुरुवार, 8 मई 2014

दम तोड़ती हड्डियों को संजीवनी

-ग्रामीण स्वास्थ्य शिक्षा अभियान में क्रांतिकारी पहल
-उपराजधानी के डॉ. संजीव चौधरी ने आस्टियोपोरोसिस के प्रति चेताया 
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नागपुर.
चटखती हड्डियों की वैश्विक गुहार से देश की ह्रदयस्थली में हुक उठी है। बिना किसी कारण हड्डियां जवाब दे रही हैं। 21वीं सदी के लिए अभिशाप बन रहे आस्टियोपोरोसिस नामक बीमारी को पनपते ही समाप्त करने के संकल्प के साथ गुरुवार को वैश्विक आगाज किया गया। नागपुर के एक होटल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान तकनीकी माध्यम से इसका प्रात्यक्षिक किया गया।
बैशाखी भी काम नहीं आएगा
वर्षों के अध्ययन एवं शोध के बाद उपराजधानी के जाने-माने अस्थिरोग विशेषज्ञ डॉ.संजीव चौधरी ने आस्टियोपोरोसिस नामक साइलेंट किलर रूपी बीमारी को मात देने के लिए साथ देने का अह्वान किया है। डॉ. चौधरी ने बताया कि विभिन्न देशों ने अपने यहां इसकी रोकथाम के लिए उपाय किए हैं। भारत जैसे देश में जनजागरुकता और संबंधित शिक्षा ही सर्वसुलभ माध्यम है और हमारे अभियान का मकसद भी उन्हीं विचारों को झंकृत करना है। वैसे तो बहुत देर हो चुकी है। आज भी अगर नहीं चेत पाए तो कलांतर में अपना ही भार उठाने से अपनी ही हड्डियां इनकार कर देंगी और फिर बैशाखियों का सहारा भी काम नहीं आएगा।
चेत जाएं
डॉ.चौधरी ने इस वैश्विक खतरे के प्रति आगाह करते हुए बताया कि हड्डियों की क्षणभंगुरता धीरे-धीरे अपना काम करती है। महिलाएं विशेष रूप से इसका शिकार बन रही हैं। भारतीय उपमहाद्वीप के साथ विडंबना यह जुट गई है कि  अस्थियों को भरपूर ताकत यहां नहीं मिल पा रही। उम्र के लगभग संधिकाल में जब महावारी समाप्ति पर होती है, आस्टियोपोरोसिस सीधे मगर धीरे आक्रमण करता है और साल-दो-साल में यह पूरी तरह जकड़ लेता है। जागरुकता के अभाव में देश की एक तिहाई आधी आबादी स्थायी विकलांगता की ओर है। डॉ. चौधरी का मानना है कि मौजूदा हालात में लगभग 20 फीसदी महिलाएं इस बीमारी से मौत की गाल में समा रही हैं। मात्र 10 फीसदी वे खुशनसीब महिलाएं हैं, जो सामान्य हो पाती हैं। अन्यथा, 70 फीसदी महिलाएं अपंगता की हालत में आ जाती हैं। वे पल-पल मरतीं हैं।
हिटको एक  क्रांतिकारी पहल
डॉ. संजीव चौधरी ने आस्टियोपोरोसिस को मात देने के लिए हिटको (हेल्थ एजुकेशन एंड टेली कंस्लटेशन ऑन ऑस्टियोपोरोसिस) तंत्र ईजाद किया है। हिटको सम्मिलत रूप से वह क्रांतिकारी पहल है, जिसमें अंग्रिम पंक्ति में खुद हम ही हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अलावा अनेक स्वयंसेवी संगठन एवं प्रबुद्ध नागरिक इस पहल में साथ खड़े हो रहे हैं।
सॉफ्टवेयर कंसलटेंट डॉ. प्रसेनजीत भोयर, शब्बीर पठान, उर्मिला शेंडे, गिरीश धोटे, नीरज चावळा, नरेश चावळा, वेदांत चावळा, सोनू वैद्य सहित अन्य लोगों ने तीन महीने के अथक प्रयासों से इस मिशन को सफल बनाया है। सुधीरराव खंडार के नेतृत्व में शिशिर खंडार, राहुल मोहोड़, प्रदीप खंडार, सुदाम बाजमघाटे, संजय गउलकर एवं श्री बैगड़े ने कार्यक्रम स्थल का प्रबंधन किया।
 सफल प्रयोग
नागपुर से लगभग 50 किलोमीटर दूर मध्यप्रदेश के छिदवाड़ा जिले के सौंसर तहसील स्थि तायगांव खैरी गांव के लोगों से डॉ. संजीव चौधरी नागपुर स्थित अपने अस्पताल से ही मुखातिब हुए। लगभग 400-500 महिलाओं ने अपनी समस्याओं का निदान पाया। उत्साही लगभग 50 महिलाओं ने कैमरे के सामने आकर अपने सवाल पूछे। डॉ. चौधरी ने उनसे सीधा संवाद किया। श्री चौधरी ने बताया कि साल के अंदर च्ििहन्त लगभग 100 गांवों की पीडि़त महिलाओं से हम सीधे संवाद करेंगे और उनकी समस्याओं को हल करने की कोशिश करेंगे।
 क्या है आस्टियोपोरोसिस
उम्र के साथ-साथ हड्डियों का कमजोर होना सामान्य बात है। मगर जब यही हड्डियां इतनी कमजोर हो जाएं कि आसानी से टूटने की कगार पर पहुंच जाएं तो उस स्थिति को ऑस्टियोपोरोसिस कहते हैं। ऑस्टियोपरोसिस में हार्मोनल बदलाव से हड्डी का घनत्व और द्रव्यमान प्रभावित हो जाता है और फिर हड्डियों में फ्रैक्चर और जोड़ों के दर्द का खतरा बढ़ जाता है।  डब्ल्यूएचओ के अनुसार महिलाओं में हीप फ्रैक्चर (कुल्हे की हड्डी का टूटना) की आशंका, स्तन कैंसर, यूटेराइन कैंसर व ओवरियन कैंसर के बराबर है।    बीएमडी जांच   
डब्ल्यूएचओ के अनुसार ऑस्टियोपोरोसिस के टेस्ट के लिए बोन मिनरल डेंसिटी(बीएमडी) की जांच होनी चाहिए। बीएमडी टेस्ट हड्डियों के टूटने की आशंकाओं का पता लगा सकती है। ऑस्टियोपोरोसिस के उपचार का शरीर पर प्रभाव का भी पता लगा सकती है। हड्डियों के फ्रैक्चर से पहले ऑस्टियोपोरोसिस का पता लगाया जा सकता है।