शनिवार, 22 मार्च 2025

अंतरिक्ष परी का धरती पर पुनर्जन्म

 सुनीता विलियम्स ने कहा-धरती पर छोटी-छोटी बातों से हम चिढ़ जाते हैं, यह बेवकूफी है

 


हम पृथ्वी पर जीवन को कुछ ज़्यादा ही गंभीरता से लेते हैं। हम कुछ छोटी-छोटी, बेवकूफ़ाना चीज़ों से भी चिढ़ जाते हैं, जबकि हमें ऐसा नहीं करना चाहिए। यह मात्र चंद शब्द नहीं, धरती पर जिंदगी का वह फलसफा है, जिस सत्य का अनुभव सुदूर अंतरिक्ष से अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने महसूस किया। वह कहती हैं कि सर्वशक्तिमान ईश्वर या अलग शक्ति ने उनसे बहुत कुछ सार्थक कर्म करवा लिए। 

संदेह की घटा छाती रही

सुनीता विलियम्स के इन शब्दों उनकी साहस परिलक्षित होती है। अपनी प्रचंड इच्छाशक्ति के आधार पर ही मात्र 7 दिनों के लिए अंतरिक्ष प्रवास पर गई यह एस्ट्रोनाट महिला 286 दिनों तक वहां रही और पृथ्वी की 4576 परिक्रमा कर डाली। कल्पनातीत है कि सुनीता विलियम्स और उनके साथी अंतरिक्ष यात्री बुच विल्मोर ने 1,21,347,491 मील का सफर तय किया। इन 9 महीनों के दौरान अनिश्चितता संदेह की घटा छाती रही कि क्या सुनीता सकुशल पृथ्वी पर लौट पाएगी! रह-रहकर कल्पना चावला के साथ हुआ भयानक हादसा दिमाग के किसी कोने में कौंधता था।

चट्टानी मनोबल और जिजीविषा

सुनीता विलियम्स की अंतरिक्ष से वापसी की यह यात्रा तकनीकी दृष्टिकोण से जितनी महत्वपूर्ण थी, उतनी ही मानवीय दृष्टि से भी प्रेरणादायक रही। अंतरिक्ष अभियान निश्चित रूप में कठिन चुनौतियों और जोखिम के बीच तय किए जाते हैं. इनमें चट्टानी मनोबल और जिजीविषा का तत्व अंतरिक्ष यात्रियों को हर विपरीत स्थिति में ऐसी दृढ़ता देता है, जिसका कोई सानी नहीं है। भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में अदभुत रिकॉर्ड बनाए हैं। उनकी वापसी की यह यात्रा केवल एक मानवीय उपलब्धि थी, बल्कि अंतरिक्ष तकनीक और सहनशक्ति की एक जटिल, प्रेरक कहानी भी है।

मानव संकल्प की जीत

सुनीता विलियम्स की धरती पर सुखद वापसी एक तकनीकी चमत्कार और मानव संकल्प की जीत सिद्ध हुई। यह यात्रा नासा, स्पेसएक्स, और अंतरिक्ष यात्रियों की टीमवर्क का परिणाम थी। भविष्य में, यह अनुभव अंतरिक्ष मिशनों को और सुरक्षित और कुशल बनाने में मदद करेगा। सुनीता की यह कहानी केवल विज्ञान की प्रगति को दर्शाती है, बल्कि मानव की जिज्ञासा और साहस को भी प्रेरित करती है।

अनूठे 150 वैज्ञानिक तकनीकी प्रयोग

सुनीता विलियम्स पहली महिला एस्ट्रोनाट हैं जिन्होंने अंतरिक्ष स्टेशन के बाहर 62 घंटे से अधिक का स्पेसवाक किया। उन्होंने अपने साथी विल्मोर के साथ अनूठे 150 वैज्ञानिक तकनीकी प्रयोग किए 900 घंटे उद्देश्यपूर्ण अनुसंधान में बिताए। इनमें पौधों का अंतरिक्ष में विकास, स्टेम सेल तकनीक का समावेश था। आटोइम्यून बीमारियों, कैंसर, रक्त से जुड़े रोगों पर उनका अनुसंधान मील का पत्थर साबित होगा। माइक्रोग्रेविटी, फ्यूल सेल रिएक्टर पर भी प्रयोग किए। 

और धरती पर लौट आई अंतरिक्ष परी

क्रू-9 मिशन, जो सितंबर 2024 में शुरू हुआ, में केवल दो अंतरिक्ष यात्री- नासा के निक हेग और रूस के रोस्कोस्मोस के अलेक्जेंडर गोर्बुनोव- शामिल थे, ताकि सुनीता और बुच के लिए वापसी की जगह बनाई जा सके। हालांकि, उनकी वापसी को फरवरी 2025 में निर्धारित किया गया था, लेकिन क्रू-10 मिशन की तैयारी में देरी के कारण यह मार्च 2025 तक टल गया। क्रू-10 मिशन 12 मार्च 2025 को फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से फाल्कन 9 रॉकेट के जरिए लॉन्च हुआ। इसमें चार अंतरिक्ष यात्री- नासा की ऐनी मैकक्लेन और निकोल आयर्स, जापान के तकुया ओनिशी, और रूस के किरिल पेस्कोव- शामिल थे। यह टीम आईएसएस पर क्रू-9 की जगह लेने के लिए पहुंची। क्रू ड्रैगनएंड्योरेंसने 16 मार्च को आईएसएस के हार्मनी मॉड्यूल से सफलतापूर्वक जुड़ाव किया। इसके बाद, दो दिनों के हैंडओवर पीरियड के दौरान, सुनीता और बुच ने अपनी जिम्मेदारियों को नए क्रू को सौंपा। सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर की वापसी क्रू ड्रैगनफ्रीडमअंतरिक्ष यान के जरिए हुई, जो क्रू-9 मिशन का हिस्सा था। यह अंतरिक्ष यान 18 मार्च 2025 को आईएसएस से अलग हुआ और 19 मार्च को फ्लोरिडा के तट पर अटलांटिक महासागर में पैराशूट की सहायता से सुरक्षित रूप से उतरा।

आग के गोले की तरह उतर रहा था  

नौ महीने के लंबे इंतजार के बाद धरती पर लौटने की खुशी से पहले कई घंटे ऐसे भी थे, जब सभी एस्ट्रोनॉट के साथ पूरी दुनिया ने अपने फिंगर्स क्रॉस कर रखे थे। धरती पर लौटने की यात्रा में स्पेसएक्स के ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट का सबसे मुश्किल चरण पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश के दौरान था। इस दौरान स्पेसक्राफ्ट की रफ्तार 28,800 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की थी, जिसके घर्षण के कारण स्पेसक्राफ्ट के बाहरी हिस्से का तापमान करीब 1,600 डिग्री सेल्सियस था। इतने ज्यादा तापमान होने के कारण स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी के वायुमंडल में एक आग के गोले की तरह उतर रहा था।

कल्पना चावला की घटना सिहरन पैदा करती रही

पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश के दौरान अंतरिक्ष यान ने लगभग 3,000 डिग्री फारेनहाइट (1,650 डिग्री सेल्सियस) के तापमान का सामना किया। इसका हीट शील्ड, जो सिरेमिक सामग्री से बना था, इस भीषण गर्मी से चालक दल की रक्षा करने में सक्षम था। आपको याद होगा कि कल्पना चावला को लेकर लौट रहा यान इसी प्रक्रिया में जलकर राख हो गया था।

ठान लें तो कुछ भी असंभव नहीं

उनकी कहानी हमें सिखाती है कि चुनौतियाँ चाहे जितनी भी बड़ी हों, यदि हमारे पास दृढ़ संकल्प और समर्पण है, तो हम उन्हें पार कर सकते हैं। उनका यह मिशन भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए कई महत्वपूर्ण संकेत देता है। सुनीता विलियम्स की यह उपलब्धि भारत और विश्वभर में युवाओं को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (स्टेम) के क्षेत्रों में करियर बनाने के लिए प्रेरित करती रहेगी।  उनके संघर्ष और सफलता की कहानी यह संदेश देती है कि सीमाएँ केवल हमारे मन में होती हैं, और यदि हम ठान लें, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। सुनीता विलियम्स की सुरक्षित वापसी पर हम गर्व और खुशी का अनुभव करते हैं। उनकी यह यात्रा केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मानव आत्मा की अदम्य इच्छाशक्ति और अन्वेषण की भावना का उत्सव भी है। हम उनके साहस, समर्पण और योगदान के लिए उन्हें नमन करते हैं और आशा करते हैं कि उनकी कहानी आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी। पूरे 9 महीने 14 दिनों के अंतरिक्ष प्रवास के बाद उनका पृथ्वी पर उतरना पुनर्जन्म से कम नहीं! 

 

 

      

शुक्रवार, 21 मार्च 2025

प्यार, बेवफाई और कत्ल का कॉकटेल… एक कातिल हसीना

रक्तरंजित कहानी एक ऐसे प्यार की है, जिसने 28 साल की चुलबुली मुस्कान को अपराध की दुनिया में धकेल दिया। स्कूल के प्यार को पाने के लिए उसने समाज, इंसानियत, प्रेम, क्रूरता की सभी सीमाएं लांघ दीं। मुस्कान के कातिल हसीना बनने की कहानी प्यार, बेवफाई और कत्ल का एक ऐसा कॉकटेल है, जो रोंगटे खड़े कर देने वाला है। 

नाना के घर से छिड़ा प्यार का तराना

नौ साल पुरानी प्रेम कहानी का खौफनाक अंत खुद की मौत से होगा, यह मर्चेंट नेवी के पूर्व कर्मचारी सौरभ को शायद इस बात का इल्म नहीं था। इस कहानी में अजीबोगरीब हिंसक मानसिकता के कई मोड़ हैं। शुरुआत होती है मेरठ के ब्रह्मपुरी के गौरीपुरा निवासी मुस्कान के नाना के घर से। वह एक ज्योतिष थे। 2015 में सौरभ कुमार की मां रेणू देवी उनके पास बच्चों की जन्मपत्री दिखाने जाती थी। मां रेनू के साथ सौरभ भी जाता था। वहां पर ही सौरभ और मुस्कान की मुलाकात हो गई। दोनों ने एक दूसरे के मोबाइल नंबर लिए। उसके बाद प्यार का सिलसिला शुरू हो गया। उस समय सौरभ इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर चुका था। उसने बीटेक में एडमिशन लिया था। इसी बीच सौरभ की मर्चेट नेवी में नौकरी लग गई। दोनों का इश्क परवान चढ़ा और वर्ष 2016 में दोनों ने लव मैरिज कर ली। हालांकि सौरभ का परिवार इस रिश्ते के खिलाफ था।  

मर्चेंट नेवी अफसर नहीं निकला पति तो टूटे अरमान

मुस्कान ने बताया कि शादी से पहले सौरभ ने खुद को मर्चेंट नेवी का अफसर बताया था। बाद में पता चला कि सौरभ मर्चेंट नेवी से नौकरी छोड़ चुका है। 2019 तक दोनों की गृहस्थी सही चली। इसी वर्ष मुस्कान ने बेटी पीहू को भी जन्म दिया। मुस्कान के लिए सौरभ ने मर्चेंट नेवी की नौकरी छोड़ दी। सौरभ के खाली रहने पर परिवार भी तानाकसी करने लगा। तब मुस्कान और सौरभ ब्रह्मपुरी के इंद्रानगर फेज वन में किराए का मकान लेकर परिवार से अलग रहने लगे। सौरभ शराब का भी आदी हो गया था, जिसके चलते दंपति में अक्सर अनबन रहने लगी। इस बीच, मुस्कान ने भी शराब पीनी शुरू कर दी। माली हालत ठीक न होने के कारण सौरभ के घर का खर्चा भी मुस्कान के मां-बाप उठाते थे। सौरभ ने परतापुर की एक प्लाईवुड कंपनी में काम करना शुरू कर दिया। मुस्कान और बेटी पीहू का खर्च अधिक होने की वजह से सौरभ ने लंदन जाने का निर्णय लिया। 2016 में सौरभ लंदन की बेकरी में नौकरी करने चला गया। 2023 में सौरभ लंदन नौकरी के लिए चला गया। 24 फरवरी 2025 को वापस लौटा और चार मार्च को उसकी हत्या कर दी गई।

जब मिले सब पुराने दोस्त

इसी दौरान मुस्कान की मुलाकात साहिल से हुई। मुस्कान और साहिल शुक्ला आठवीं कक्षा तक एक साथ पढ़े थे। साहिल ने मुस्कान को अपने पुराने दोस्तों के वॉट्सऐप ग्रुप में ऐड कर दिया। इसके बाद दोनों की पर्सनल चैटिंग होने लगी, जो मोहब्बत में बदल गई। कक्षा एक से लेकर आठ तक की पढ़ाई मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने एक साथ की। स्कूल में कक्षा पांच से लेकर आठ तक दोनों आपस में दोस्त रहे। कक्षा आठ के बाद मुस्कान ने पढ़ाई छोड़ दी थी, जबकि साहिल शुक्ला इंटरमीडिएट करने के बाद सीए की पढ़ाई कर रहा था। 2016 में मुस्कान की शादी सौरभ के साथ हो गई। 

मॉल में पार्टी से घऱ में अय्याशी तक

वॉट्सऐप ग्रुप के सभी पुराने दोस्तों ने शॉपरिक्स मॉल में एक पार्टी का आयोजन किया, जहां पर मुस्कान और साहिल भी शामिल हुए। उसके बाद से मुस्कान और साहिल की फोन पर बातचीत होने लगी। सौरभ की गैर-मौजूदगी में मुस्कान ने साहिल को घर पर बुला लिया। दोनों में संबंध बनने के बाद मुस्कान ने सौरभ से दूरी बनानी शुरू कर दी। इसी बीच सौरभ के घर से जाने पर साहिल रोजाना घर पर आने लगा। एक दिन मकान मालिक ने सौरभ को इसकी जानकारी दी। इसी को लेकर सौरभ और मुस्कान में विवाद शुरू हो गया। मुस्कान ने साहिल का साथ नहीं छोड़ा, तब सौरभ ने 2021 में तलाक का मुकदमा डाल दिया। परिवार के समझाने पर सौरभ मान गया और 2023 में लंदन चला गया। उसके बाद मुस्कान का कोई रोकने वाला नहीं था। बेटी को मायके में छोड़ने के बाद साहिल को मुस्कान घर बुला लेती थी। हालात यह हो गए कि मुस्कान और साहिल ने सौरभ को रास्ते से हटाने का निर्णय लेकर हत्या की प्लानिंग की। सौरभ हत्याकांड में नए-नए खुलासे हो रहे हैं। जांच में सामने आया है कि मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला ने पूरी प्लानिंग के साथ वारदात को अंजाम दिया। 

टाइम लाइन इस प्रकार है

-2024 में नवंबर में हत्या की योजना बनाई

-300 रुपये में उस्तरा और पॉली बैग खरीदे 

-2025 में 22 फरवरी नींद की गोलियां लीं  

चाकू से ताबड़तोड़ वार

तीन मार्च को सौरभ अपनी मां रेणु के घर से लौकी के कोफ्ते की सब्जी लाया था। उसने कोफ्ते गर्म करने के लिए मुस्कान को दिए। मुस्कान ने सब्जी में नींद की व अन्य नशीली दवाइयां मिला दीं। इसके बाद सौरभ सो गया। सौरभ के सोने के बाद मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल को कॉल करके घर बुला लिया। साहिल घर पहुंचा और दोनों ने मिलकर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर सौरभ की हत्या कर दी। शव को बाथरूम में ले जाकर उस्तरे से पहले उसकी गर्दन काटी। इसके बाद हाथ और कलाइयों से हाथ काटे। दोनों की योजना शव के टुकड़े-टुकड़े कर पॉली बैग में भरकर अलग-अलग स्थान पर फेंकने की थी। दोनों ने सौरभ के धड़ को पॉली बैग में भरकर वहीं डबल बेड के बॉक्स में रख दिया।

चाकू सीने में घोंपा, छुरे से टुकड़े किए

पुलिस के मुताबिक, मुस्कान और साहिल ने सौरभ के सीने में चाकू घोंपा और फिर शव को बाथरूम में ले जाकर छुरे से उसके 15 टुकड़े किए। शव सीमेंट में इस कदर धंसा हुआ था कि पोस्टमार्टम के लिए पूरे ड्रम को ही मोर्चरी भेजना पड़ा। पुलिस ने ड्रम तोड़कर शव निकाला, जिसमें सिर, दोनों हाथ, पैर के पंजे अलग-अलग मिले।

कटा सिर और कलाइयों को बैग में ले गया  

कटा हुआ सिर और कलाइयों से कटे हाथ साहिल दूसरे बैग में रखकर अपने घर ले गया। चार मार्च को उन्हें अपने घर कमरे में रखा, मगर उन्हें ठिकाने नहीं लगा सका। 24 घंटे तक सौरभ का सिर और हाथ साहिल के घर रखे रहे। पांच मार्च को उन्होंने घंटाघर से ड्रम खरीदा और पॉली बैग के रखे धड़ को उसमें डाल दिया। कुछ देर बाद साहिल सिर और हाथ ले आया और उन्हें भी ड्रम में डाल दिए। ऊपर से सीमेंट और डस्ट का घोल कर उसमें भरकर उसे सील कर दिया।

सीने पर वार खाकर भी जिंदा था सौरभ

-पुलिस के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि सीने पर वार करने के बाद भी सौरभ की मौत नहीं हुई थी। उस समय तक भी वह जिंदा था। बाथरूम में गर्दन कटने पर सौरभ ने दम तोड़ दिया। उसके शरीर पर चाकू से करीब दस वार किए गए।

-सौरभ की हत्या करने से पहले मुस्कान और साहिल ने हत्या के तरीके जानने के लिए यूट्यूब खंगाला। मुस्कान ने हसीन दिलरुबा फिल्म के दोनों पार्ट देखे। चाकू से हत्या करने का आइडिया भी यूट्यूब से ही लिया था। 

-पुलिस पूछताछ में मुस्कान ने बताया कि ड्रम में शव रखकर सीमेंट डालने का आइडिया साहिल का था। प्लानिंग थी कि ड्रम को मजदूर लगाकर उठाकर बाहर फेंक देंगे, जिससे किसी को शक भी नहीं होगा। 

-शव को ड्रम में सीमेंट के साथ सील करने के बाद मुस्कान और साहिल उसे उठा नहीं पाए, इसलिए घर के अंदर ही ड्रम को छोड़कर ताला डाल शिमला चले गए। 

-शिमला से लौटने के बाद मुस्कान ने मजदूरों को बुलाकर ड्रम उठाने का प्रयास किया। चार मजदूर भी ड्रम नहीं उठा पाए। उसके बाद ड्रम के अंदर से बदबू भी बाहर आने लगी थी।

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2021 में तलाक तक की आ गई थी नौबत

मकान मालिक ने साहिल और मुस्कान को आपत्तिजनक हालत में पकड़ लिया था और इसकी शिकायत फोन पर सौरभ से की थी। इस पर सौरभ ने मुस्कान को खरी खोटी सुनाई थी। उसने 2021 में तलाक के कागज भी तैयार करा लिए। हालांकि, बाद में दोनों के बीच सहमति बनी कि तलाक नहीं लेंगे और बेटी के जीवन को देखते हुए साथ-साथ रहेंगे। इसके बावजूद मुस्कान ने साहिल से मिलना नहीं छोड़ा। जब सौरभ यहां आता था तो वह साहिल से नहीं मिलती थी, लेकिन उसके जाते ही फिर मिलने लगती थी। इस बार साहिल दो साल बाद लंदन से मेरठ आया था। सौरभ के बड़े भाई राहुल उर्फ बबलू ने रोते हुए कहा-यदि उस समय तलाक हो जाता तो मेरे भाई की हत्या नहीं होती और यह दिन देखना नहीं पड़ता।  

 

  


रविवार, 9 मार्च 2025

जेल भेजने की धमकी पर बाबा बागेश्वर बोले- ठटरी बंध जाएगी


गोपालगंज. 

बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को लालू यादव की पार्टी के नेता ने कहा था कि अगर बिहार आए, तो उन्हें जेल में डाल दिया जाएगा। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक चंद्रशेखर की धमकी का करारा जवाब  देते हुए बाबा ने कहा कि तुम रोहिंग्या और घुसपैठियों को रोक नहीं पाए, हम तो भारत के हैं, हम बिहार के हैं, बिहार हमारा है और हम आते रहेंगे।  जब तक जिंदा रहेंगे, दरबार लगाएंगे और जिंदगी भर बिहार आएंगे। बिहार हमारा घर है, हमारी आत्मा है। हमारा मकसद किसी राजनीतिक दल का समर्थन करना नहीं, बल्कि भगवान बजरंग बली की भक्ति का प्रचार करना है।  

कहा-किसी की धमकी से नहीं डरने वाले  

बाबा ने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले जब कुछ लोगों ने उन्हें पटना एयरपोर्ट पर उतरने से रोकने की कोशिश की थी, तब बिहार के लोगों ने एकजुट होकर 12 लाख की भीड़ जुटाई थी। उस दिन कथावाचन के दौरान बना यह वर्ल्ड रिकॉर्ड उनके समर्थन का प्रतीक बन गया था। गोपालगंज में भी उस दिन का दृश्य कुछ कम नहीं था- हजारों लोग उनकी बात सुनने के लिए जमा हुए थे, और माहौल में भक्ति के साथ-साथ एक संदेश था कि वे किसी धमकी से डरने वाले नहीं।  राजद विधायक चंद्रशेखर का कहना था कि धीरेंद्र शास्त्री संविधान विरोधी बातें करते हैं और हिंदू राष्ट्र की वकालत करते हैं, जो भारत के संविधान के खिलाफ है।  


कुलभूषण जाधव का अपहरण करने वाले को बलूचिस्तान में मारी गोली

नई दिल्ली.  

भारतीय व्यवसायी और पूर्व भारतीय नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव का ईरान से अपहरण कराने में भूमिका निभाने वाले मुफ्ती शाह मीर की बलूचिस्तान के तुरबत में शुक्रवार रात को गोली मारकर हत्या कर दी गई। 


बेहद नजदीक से गोलियां दागीं

यह घटना उस समय हुई जब मीर स्थानीय मस्जिद से रात की नमाज अदा करके बाहर निकल रहा था। इसी दौरान बाइक सवार हमलावरों ने उसे घेर लिया और बेहद नजदीक से गोलियां दाग दीं। रिपोर्ट के अनुसार, मीर को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। मीर की हत्या के बाद पाकिस्तान में यह सवाल फिर उठने लगा है कि आखिर भारत के विरोधियों को निशाना बनाकर हत्याएं कौन कर रहा है।

कई बिचौलिए शामिल थे 

मार्च 2016 में जाधव को जैश अल-अद्ल के नेता मुल्ला उमर इरानी के नेतृत्व वाले एक गिरोह ने जाधव को ईरान-पाकिस्तान सीमा से अगवा किया था। इस अपहरण में मीर सहित कई बिचौलिए शामिल थे, जिन्होंने जाधव को पाकिस्तानी सेना के हवाले कर दिया था। नवंबर 2020 में इसी इलाके में इरानी और उसके दो बेटों की भी हत्या कर दी गई थी, जिसे आईएसआई से जुड़ी गतिविधि माना गया था।

इस आरोप में पकड़ा गया था

गौरतलब है कि कुलभूषण जाधव भारतीय नौसेना से जल्दी रिटायर होने के बाद ईरान के चाबहार में एक व्यवसाय चला रहे थे। मार्च 2016 में उनका पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा के चमन क्षेत्र में अपहरण कर लिया गया था, जिसके बाद उन्हें पाकिस्तान ले जाया गया। पाकिस्तानी सैन्य अदालत ने अप्रैल 2017 में उन्हें जासूसी और विध्वंसक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में मौत की सजा सुनाई थी। भारत ने इस फैसले को पूर्व नियोजित हत्या करार दिया था। अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने इस सजा पर रोक लगाते हुए पाकिस्तान को मामले की पुनः समीक्षा करने और भारत को कांसुलर एक्सेस प्रदान करने का आदेश दिया था।


उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ एम्स में भर्ती, सीने में दर्द

नई दिल्ली.   

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को बेचैनी और सीने में दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती करवाया गया। जानकारी के अनुसार, शनिवार देर रात 73 साल के धनखड़ को देर रात करीब दो बजे एम्स अस्पताल ले जाया गया। उपराष्ट्रपति को एम्स के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. राजीव नारंग की देखरेख मेंक्रिटिकल केयर यूनिट’ (सीसीयू) में भर्ती कराया गया।   सूत्र ने बताया कि उनकी हालत स्थिर है। उन्हें निगरानी में रखा गया है। डॉक्टरों का एक समूह उनकी स्थिति पर नजर रख रहा है। 


प्रधानमंत्री ने उपराष्ट्रपति के शीघ्र स्वस्थ होने की भी कामना की। पीएम मोदी ने ट्वीट में लिखा, एम्स जाकर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ जी के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। मैं उनके अच्छे स्वास्थ्य और शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। इससे पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा भी धनखड़ का हालचाल जानने के लिए दिन में पहले एम्स गए थे।